विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों के अस्त्रों का उल्लेख बहुत स्पष्ट रूप से किया गया है। मुख्य रूप से यमदूत दो प्रकार के अस्त्र धारण करते हैं।
पहला — पाश (फंदा या रस्सी)। यह यमदूतों का प्रमुख अस्त्र है जिससे वे जीवात्मा को बाँधते हैं। मृत्यु के पश्चात वे पापी जीवात्मा के गले में पाश बाँध देते हैं और उसे घसीटते हुए यमलोक ले जाते हैं। यह पाश पापों का प्रतीक है — व्यक्ति के कर्म ही उसके बंधन हैं।
दूसरा — दंड (डंडा या छड़ी)। यह दंड-विधान का प्रतीक है। यमदूत इससे पापी को नरकमार्ग में बलात् आगे ले जाते हैं। गरुड़ पुराण में वर्णन है कि यमदूत पापी की पीठ पर चाबुक भी मारते हैं और उसे आगे ढकेलते हैं।
इसके अतिरिक्त यमदूतों के नाखून स्वयं आयुध (शस्त्र) की भाँति बताए गए हैं — तीखे और भयावह।
नरक में दंड देते समय अन्य उपकरणों का भी वर्णन है — मुगदर (गदा), कोड़े, अंकुश आदि। यह समस्त वर्णन इस सत्य को रेखांकित करता है कि पाप का परिणाम अनिवार्यतः कष्टकारी होता है।





