विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों के हाथ में पाश (रस्सी/फंदा) का अत्यंत गहरा प्रतीकात्मक महत्व है। यह केवल एक भौतिक हथियार नहीं है — इसका दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ भी है।
पाश का पहला अर्थ — यह पापकर्मों का बंधन है। जो व्यक्ति जीवन भर मोह, लोभ, क्रोध और पाप में उलझा रहा, उसने स्वयं को अदृश्य बंधनों में जकड़ लिया था। यमदूत का पाश उन्हीं बंधनों का स्थूल प्रतीक है — मृत्यु के बाद वे बंधन दिखाई देते हैं।
पाश का दूसरा अर्थ — यह न्याय का बंधन है। पापी जीव यमलोक जाना नहीं चाहता, वह भागना चाहता है। पाश यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी अपने कर्मफल से नहीं बच सकता। कर्म का न्याय अनिवार्य है — पाश उसी अनिवार्यता का प्रतीक है।
पाश का तीसरा अर्थ — यह मोह का प्रतीक है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि पाश में बँध जाने के बाद जीव अपने शरीर में लौट नहीं सकता, परिजनों के पास नहीं जा सकता। यह वही मोह-बंधन है जिसे जीव जीवन भर पाले रहा, अब वह उसी का शिकार है।
इस प्रकार पाश केवल रस्सी नहीं — यह पाप, मोह और कर्म-बंधन का शाश्वत प्रतीक है।





