विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों द्वारा जीव को बाँधकर ले जाने के कई कारण बताए गए हैं।
पहला कारण — पापी जीव स्वयं नहीं जाना चाहता। उसे अपने परिजनों, घर और शरीर से मोह है। वह वापस लौटना चाहता है। बिना बंधन के वह यममार्ग पर नहीं चलेगा। पाश इसी जीव के मोह और पाप के प्रतिरोध को तोड़ने का साधन है।
दूसरा कारण — यह न्याय की प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है। यमराज का शासन कर्मों के आधार पर न्याय का शासन है। कोई भी जीव इससे नहीं बच सकता। बाँधकर ले जाना यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक जीव अपने कर्मों का हिसाब चुकाए।
तीसरा कारण — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जीव अपने मृत शरीर में लौटने का प्रयास करता है। बंधन इसे रोकता है। 'यमदूत के पाश में बँधे होने के कारण वह मुक्त नहीं हो पाती' — यह वर्णन प्रेतकल्प में मिलता है।
चौथा कारण — यह इस सत्य को रेखांकित करता है कि पाप का मार्ग स्वतंत्रता नहीं देता, बंधन देता है। जीवन में पाप करने वाला मृत्यु के बाद बंधन में जाता है — यही कर्म का न्याय है।
पुण्यात्मा को बाँधकर नहीं ले जाया जाता। देवदूत उसे स्वेच्छा से, आनंद से दिव्य लोक की ओर ले जाते हैं।





