विस्तृत उत्तर
अभिवादन और प्रणाम — दोनों भारतीय संस्कृति के श्रद्धापूर्ण अभिव्यक्तियाँ हैं, परंतु इनके अर्थ और उपयोग में स्पष्ट अंतर है।
अभिवादन का शाब्दिक अर्थ है 'अभि + वादन' — अर्थात सामने किसी को अच्छी वाणी से संबोधित करना। यह एक व्यापक शब्द है जिसमें नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम, वंदन — सभी प्रकार के अभिव्यंजन आ जाते हैं। अभिवादन में नम्रता, आदर और सेवाभाव — तीनों समाहित रहते हैं। यह किसी भी व्यक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने की सामान्य क्रिया है।
प्रणाम एक विशेष प्रकार का अभिवादन है जो अपने से बड़ों, गुरुओं, माता-पिता और भगवान के प्रति गहरे आदर और समर्पण के भाव से किया जाता है। 'प्रणाम' शब्द 'प्र + नमन' से बना है जिसका अर्थ है 'अत्यधिक और विशेष नमन'। इसमें केवल वाणी नहीं, बल्कि शरीर भी झुकता है। प्रणाम में एक गहरी भावनात्मक और आध्यात्मिक श्रद्धा होती है।
सरल शब्दों में — अभिवादन किसी को भी किया जाता है, चाहे वह बराबर का हो या बड़ा। प्रणाम केवल अपने से बड़े, आदरणीय और पूजनीय व्यक्ति या ईश्वर को किया जाता है। नमस्ते या नमस्कार अभिवादन के रूप हैं, जबकि प्रणाम उससे अधिक गहरे समर्पण का भाव है।

