विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण दोनों स्वर्लोक की मूल अवधारणा पर एकमत हैं परंतु अपने-अपने दृष्टिकोण से इसका वर्णन करते हैं। विष्णु पुराण स्वर्लोक को ब्रह्मांडीय कालगणना से जोड़ता है। विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के सप्तम अध्याय में महर्षि पराशर ने सृष्टि के सर्ग और प्रतिसर्ग (प्रलय) का वर्णन किया है और स्पष्ट किया है कि नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक की भौतिक संरचना भी नष्ट हो जाती है। विष्णु पुराण स्वर्लोक की अनित्यता और उससे वापसी का वर्णन भी करता है। दूसरी ओर श्रीमद्भागवत पुराण स्वर्लोक का सबसे विस्तृत और सूक्ष्म वर्णन प्रस्तुत करता है — सुमेरु पर्वत की संरचना, सप्त-द्वीपों का विवरण, शिशुमार चक्र का खगोलीय वर्णन, दिव्य झीलों और उद्यानों का विस्तृत विवरण, अरुणोदा और जम्बू नदियों का वर्णन। भागवत पुराण भक्ति के दृष्टिकोण से स्वर्लोक को भगवान वासुदेव के विराट स्वरूप के एक अंग के रूप में देखता है।
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