विस्तृत उत्तर
नहीं, सकाम कर्म से महर्लोक प्राप्त नहीं होता। केवल सकाम दान, सामान्य व्रत और भौतिक यज्ञ मनुष्य को अधिक से अधिक स्वर्लोक तक ही ले जा सकते हैं। स्वर्लोक के भोगों के समाप्त होने के पश्चात् जीव को पुनः मृत्युलोक में लौटना पड़ता है। परन्तु महर्लोक में प्रवेश के लिए विशुद्ध सत्त्वगुण, पूर्ण अनासक्ति और निष्काम भावना की आवश्यकता होती है। सकाम कर्म वे कर्म हैं जो किसी फल की इच्छा से किए जाते हैं — जैसे स्वर्ग पाने के लिए यज्ञ करना या धन पाने के लिए दान देना। ऐसे कर्म जीव को त्रैलोक्य में ही बाँधे रखते हैं। महर्लोक के लिए निष्काम भाव से की गई कठोर तपस्या, अखंड ब्रह्मचर्य और पूर्ण वैराग्य आवश्यक है।
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