लोकसकाम कर्म से महर्लोक मिल सकता है क्या?नहीं, सकाम कर्म से महर्लोक नहीं मिलता — यह केवल स्वर्लोक तक ले जाता है। महर्लोक के लिए निष्काम तपस्या, वैराग्य और पूर्ण अनासक्ति आवश्यक है।#सकाम कर्म#महर्लोक#स्वर्लोक
मंदिर ज्ञानमंदिर में चढ़ाए गए फूल घर लाना चाहिए या नहीं?दो मत। नहीं: 'दिया वापस=अशुभ'। हां: 'प्रसाद=कृपा'। तुलसी/बिल्व=प्रसाद। पैर से न छुएं। नदी/पीपल विसर्जन। संप्रदाय अनुसार दोनों मान्य।#फूल#चढ़ाए#घर
मंदिर ज्ञानमंदिर में चढ़ाई गई सामग्री को दोबारा चढ़ा सकते हैं या नहीं?वर्जित। एक बार अर्पित = निर्माल्य → दोबारा = 'दिया वापस'=अशुभ। प्रसाद = ग्रहण, न चढ़ाएं। मंदिर A→B = वर्जित। 'ताजा+नया+शुद्ध = भगवान को।'#सामग्री#दोबारा#चढ़ाना
घर मंदिरघर के मंदिर में किन देवताओं की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए?विवादास्पद। कुछ: नटराज (तांडव/संहार), रौद्र शिव, बड़ी (>9 इंच), खंडित = बचें। शुभ: बालकृष्ण, लक्ष्मी-गणेश, शांत शिव, राधा-कृष्ण। अनेक: 'सभी शुभ, भाव > रूप।'#मूर्ति#नहीं#रखनी
मंत्र जप नियममंत्र अनुष्ठान के दौरान भोजन में क्या खाएं और क्या नहीं?सात्विक: दूध/घी/फल/चावल/मूंग/खीर/मेवा। वर्जित: प्याज-लहसुन, मांस-मदिरा, बासी, तीखा/खट्टा। एक समय (कठोर) / दो (सामान्य)। घर का ताजा। फलाहार उत्तम।#भोजन#अनुष्ठान#खाएं
घर मंदिरघर के मंदिर में शयनकक्ष में रखना उचित है या नहीं?बचें (दम्पत्य=अशुद्ध, ऊर्जा conflict)। अलग कक्ष सर्वोत्तम। विकल्प नहीं: पर्दे से ढकें, पूर्व/उत्तर, पैर ओर नहीं। क्रम: अलग>रसोई>ड्राइंग>शयनकक्ष (अंतिम)।#शयनकक्ष#बेडरूम#मंदिर
घर मंदिरघर के मंदिर में प्रतिदिन पूजा न कर पाएं तो क्या करें?2 मिनट: दीपक+अगरबत्ती+'ॐ' 3 बार। या जल अर्पण+प्रणाम। मानस 'ॐ नमः शिवाय' 11। परिवार बांटें। अपूजित न छोड़ें। 'कुछ > शून्य।' 'भगवान भाव देखते, अवधि नहीं।'#प्रतिदिन#पूजा#नहीं
घर मंदिरघर के मंदिर में नटराज की मूर्ति रखनी चाहिए या नहीं?विवादास्पद। कुछ वास्तु: नहीं (तांडव=संहार)। अन्य: हां (पंचकृत्य=सम्पूर्ण, CERN में भी)। 'शिव=शुभ — भाव प्रधान।' संदेह: शांत शिव = निर्विवाद।#नटराज#मूर्ति#रखनी
मंदिर ज्ञानमंदिर के गर्भगृह में सामान्य भक्त क्यों प्रवेश नहीं कर सकते?ऊर्जा तीव्र, 3 तरफ बंद = concentrated, शुद्धता (पुजारी = विशेष शुद्ध), भीड़ नियंत्रण।: 'छोटा, अंधेरा = बाहरी दुनिया पीछे।'#गर्भगृह#प्रवेश#नहीं
मंदिर ज्ञानमंदिर से बाहर निकलते समय घंटी बजानी चाहिए या नहीं?वर्जित। श्लोक: 'गमनार्थं तु राक्षसाम्' — बाहर जाते घंटी = राक्षस गमन। प्रवेश = आवाहन। बाहर = मौन विदाई। 2-3 बार पर्याप्त।#बाहर#निकलते#घंटी
मंदिर ज्ञानमंदिर में पैर फैलाकर क्यों नहीं बैठना चाहिए?अपमान (पैर=नीचा), ऊर्जा leak, योग (ऊर्ध्व=सुखासन), शिष्टाचार। सही: सुखासन/वज्रासन/खड़े। पैर=मूर्ति विपरीत। बीमार/वृद्ध = जैसे संभव — भगवान समझते हैं।#पैर#फैलाना#नहीं