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मंदिर ज्ञान📜 पूजा शिष्टाचार1 मिनट पठन

मंदिर में पैर फैलाकर क्यों नहीं बैठना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

अपमान (पैर=नीचा), ऊर्जा leak, योग (ऊर्ध्व=सुखासन), शिष्टाचार। सही: सुखासन/वज्रासन/खड़े। पैर=मूर्ति विपरीत। बीमार/वृद्ध = जैसे संभव — भगवान समझते हैं।

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विस्तृत उत्तर

पैर फैलाना = वर्जित — कारण:

  1. 1अपमान: पैर = शरीर सबसे नीचा। भगवान/गुरु/मूर्ति ओर पैर = अपमान।
  2. 2ऊर्जा: पैर = ऊर्जा बाहर निकलने का मार्ग। फैलाना = पूजा ऊर्जा leak।
  3. 3योग: सुखासन/पद्मासन = ऊर्जा ऊर्ध्व (ऊपर)। पैर फैलाना = ऊर्जा नीचे (भूमि)।
  4. 4शिष्टाचार: किसी भी बड़े/सम्मानित व्यक्ति ओर पैर = अशिष्ट — भगवान = सर्वोच्च।
  5. 5अन्य भक्त: भीड़ = पैर फैलाना = दूसरों को असुविधा।

सही: सुखासन (पालथी), वज्रासन (घुटने), खड़े। पैर = मूर्ति विपरीत दिशा।

अपवाद: बीमार/वृद्ध/विकलांग = जैसे बैठ सकें — भगवान समझते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
पूजा शिष्टाचार
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