विस्तृत उत्तर
नहीं — पुराणों और महाभारत के अनुसार सुदर्शन चक्र को रोकना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
सुदर्शन चक्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह एक बार छोड़े जाने पर अपने लक्ष्य का नाश करके ही लौटता है। यह मन की गति से चलता है और किसी भी दिशा में जा सकता है। यह पलक झपकते ही लाखों योजन की दूरी तय कर लेता है। इसकी 108 धाराएं विभिन्न दिशाओं में एक साथ वार करती हैं।
महाभारत में शिशुपाल वध और भागवत पुराण में अंबरीष-दुर्वासा प्रसंग में इसे अजेय बताया गया है। दुर्वासा मुनि जैसे महाशक्तिशाली ऋषि ने सुदर्शन से बचने के लिए ब्रह्मा, शिव सभी से सहायता माँगी परंतु किसी ने सुदर्शन को रोकने में असमर्थता व्यक्त की।
केवल एक उपाय पुराणों में बताया गया है — भगवान विष्णु की शरण में जाना और उनसे क्षमा माँगना। यदि विष्णु स्वयं चाहें तो सुदर्शन रुक सकता है। लेकिन यह रोकना भी अस्त्र की विफलता नहीं, बल्कि धारणकर्ता विष्णु का अपना निर्णय है। किसी अन्य अस्त्र से सुदर्शन को रोकने का कोई उल्लेख पुराणों में नहीं मिलता।





