विस्तृत उत्तर
वैष्णवास्त्र की सबसे प्रमुख और विस्मयकारी शक्ति इसकी अकल्पनीय गति थी। यह अस्त्र लक्ष्य की ओर पहले आकाश में अत्यंत तीव्रता से ऊपर उठता और फिर उतनी ही प्रचंडता से शत्रु पर प्रहार करता था। इसका वार कभी भी निष्फल नहीं होता था — लक्ष्य का भेद होना सुनिश्चित था। यह दिव्यास्त्र प्रत्येक जीवित प्राणी का संहार करने में सक्षम था। इसकी एक और असाधारण विशेषता यह थी कि स्वयं भगवान विष्णु के अतिरिक्त कोई भी इसे निरस्त या निष्प्रभाव नहीं कर सकता था। यह गुण वैष्णवास्त्र को ब्रह्मास्त्र या पाशुपतास्त्र जैसे अन्य महाशक्तिशाली अस्त्रों से भी एक अलग और विशिष्ट श्रेणी में स्थापित करता है।
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