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विशेष मृत्यु श्राद्ध प्रश्नोत्तर — 14 प्रश्न

विशेष मृत्यु श्राद्ध से जुड़े 14 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 14 प्रश्न

सर्वपितृ अमावस्या क्या है?

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, जो आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहते हैं। सर्वपितृ का अर्थ सभी पितरों की अमावस्या है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि पूर्णतः विस्मृत हो चुकी हो।

सर्वपितृ अमावस्यामहालया अमावस्यापितृ पक्ष समाप्ति
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मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि पूर्णतः विस्मृत हो चुकी हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या को किया जाता है। यह आश्विन कृष्ण अमावस्या है, जो पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे पवित्र दिन है।

अज्ञात तिथिसर्वपितृ अमावस्यामहालया अमावस्या
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भरणी पंचमी श्राद्ध क्या है?

भरणी पंचमी पितृ पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष नाम है, जब अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों का श्राद्ध किया जाता है। भरणी नक्षत्र से जुड़ा यह नाम है, और इसकी विकल्प तिथि त्रयोदशी भी निर्धारित है।

भरणी पंचमीबाल्यावस्था मृत्युअविवाहित
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बच्चे की मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों का श्राद्ध शास्त्रों के अनुसार पंचमी (भरणी पंचमी) या त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। दोनों तिथियाँ शास्त्रों में निर्धारित हैं और कुलाचार के अनुसार इनमें से किसी एक का चयन किया जा सकता है। यह विशेष कोटि के मृतकों के लिए है।

बाल्यावस्था मृत्युपंचमीत्रयोदशी
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यति का श्राद्ध कब होता है?

यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

यति श्राद्धद्वादशीसंन्यासी
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संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

संन्यासी (यति) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को किया जाता है। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित विशेष तिथि है।

संन्यासी श्राद्धद्वादशीयति
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मातृ नवमी किसे कहते हैं?

मातृ नवमी = अविधवा नवमी का दूसरा नाम। पितृ पक्ष की वह नवमी तिथि जब सुहागिन (पति के जीवित रहते मृत) स्त्रियों — विशेषतः माताओं — का श्राद्ध किया जाता है। 'मातृ' = माता, माताओं को विशेष सम्मान देने वाला नाम।

मातृ नवमीअविधवा नवमीमाता श्राद्ध
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अविधवा नवमी क्या है?

अविधवा नवमी = पितृ पक्ष की वह विशेष नवमी तिथि जब उन स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु पति के जीवित रहते हुई हो। 'अविधवा' = जो विधवा नहीं, सधवा। इसे 'मातृ नवमी' भी कहते हैं।

अविधवा नवमीमातृ नवमीसुहागिन स्त्री
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सुहागिन स्त्री का श्राद्ध कब होता है?

सुहागिन (अविधवा) स्त्री का श्राद्ध — जिसकी मृत्यु पति के जीवित रहते हुई हो — पितृ पक्ष की 'नवमी' तिथि को होता है। इसे 'अविधवा नवमी' या 'मातृ नवमी' कहा जाता है।

सुहागिन स्त्रीअविधवा नवमीमातृ नवमी
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विष या दुर्घटना से मरे का श्राद्ध कब?

विष या दुर्घटना से मरे व्यक्ति का श्राद्ध 'चतुर्दशी' को होता है। यह अकाल मृत्यु की कोटि में आता है। इसे 'घट चतुर्दशी' या 'घायल चतुर्दशी' कहते हैं। मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो — श्राद्ध केवल चतुर्दशी को। यह कठोर और अलङ्घ्य नियम है।

विष से मृत्युदुर्घटनाचतुर्दशी श्राद्ध
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आत्महत्या करने वाले का श्राद्ध कब करें?

आत्महत्या से मरे व्यक्ति का श्राद्ध 'चतुर्दशी' को होता है। यह अकाल मृत्यु की कोटि में आता है। इसे 'घट चतुर्दशी' या 'घायल चतुर्दशी' कहते हैं। मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो — श्राद्ध केवल चतुर्दशी को। यह कठोर और अलङ्घ्य नियम है।

आत्महत्या श्राद्धचतुर्दशीअकाल मृत्यु
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घट चतुर्दशी क्या है?

घट चतुर्दशी = पितृ पक्ष की वह विशेष चतुर्दशी तिथि जब अकाल मृत्यु (विष, दुर्घटना, युद्ध, पशु आक्रमण, आत्महत्या) से मरे व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है। इसे 'घायल चतुर्दशी' भी कहते हैं। यह कठोर और अलङ्घ्य नियम है।

घट चतुर्दशीघायल चतुर्दशीअकाल मृत्यु
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चतुर्दशी श्राद्ध किसका होता है?

चतुर्दशी श्राद्ध = विष, दुर्घटना, युद्ध, पशु आक्रमण या आत्महत्या से मरे (अकाल मृत्यु / शस्त्राघात) व्यक्तियों का श्राद्ध। इसे 'घट चतुर्दशी' या 'घायल चतुर्दशी' कहते हैं। केवल इसी तिथि को होता है — मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो।

चतुर्दशी श्राद्धअकाल मृत्युघट चतुर्दशी
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अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध कब किया जाता है?

अकाल मृत्यु / शस्त्राघात से मरे (विष, दुर्घटना, युद्ध, पशु आक्रमण, आत्महत्या) व्यक्तियों का श्राद्ध केवल 'चतुर्दशी' को होता है। इसे 'घट चतुर्दशी' या 'घायल चतुर्दशी' कहते हैं। यह धर्मशास्त्र का कठोर और अलङ्घ्य नियम — मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो भी श्राद्ध चतुर्दशी को ही।

अकाल मृत्युचतुर्दशीघट चतुर्दशी
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विशेष मृत्यु श्राद्ध — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर विशेष मृत्यु श्राद्ध श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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विशेष मृत्यु श्राद्ध को गहराई से समझने का तरीका

विशेष मृत्यु श्राद्ध प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

14 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।