विस्तृत उत्तर
भरणी पंचमी पितृ पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष नाम है, जो बच्चों और अविवाहितों के श्राद्ध से जुड़ा है। शास्त्रीय परिभाषा के अनुसार अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों के लिए शास्त्रों में पंचमी (भरणी पंचमी) या त्रयोदशी तिथि निर्धारित की गई है। नाम का अर्थ देखा जाए तो भरणी एक नक्षत्र का नाम है, और पंचमी पंचांग की पाँचवीं तिथि है। इसलिए इसे भरणी नक्षत्र से जुड़ी पंचमी कहा जाता है।
इस श्राद्ध की तिथि पितृ पक्ष की पंचमी होती है, अर्थात् आश्विन कृष्ण पंचमी। यह श्राद्ध दो प्रकार के मृतकों के लिए किया जाता है। पहले वे अविवाहित मृतक जो बिना विवाह के मृत्यु को प्राप्त हुए, और दूसरे वे बच्चे जिनकी मृत्यु बचपन में हुई। भरणी पंचमी के अतिरिक्त त्रयोदशी भी विकल्प तिथि के रूप में निर्धारित है, जिसका चयन कुलाचार के अनुसार किया जाता है।
भरणी पंचमी की कई विशेषताएँ हैं। यह विशिष्ट कोटि के मृतकों के लिए है, सामान्य पितरों के लिए नहीं, बल्कि केवल अविवाहित या बाल्यावस्था के मृतकों के लिए। यह शास्त्र-निर्धारित तिथि है जिसमें कोई संदेह नहीं, क्योंकि शास्त्रों में इसका स्पष्ट उल्लेख है। इसका नाम नक्षत्र-आधारित है, अर्थात् भरणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण इसे विशेष पवित्र पहचान प्राप्त है।
इसका शास्त्रीय आधार बहुत मजबूत है। धर्मशास्त्रों, विशेषकर याज्ञवल्क्य स्मृति, पराशर स्मृति और विभिन्न पुराणों में अकाल मृत्यु या अन्य विशेष अवस्थाओं के लिए पृथक तिथियों का कड़ा निर्देश है। यह विशेष तिथि इसलिए निर्धारित की गई क्योंकि अविवाहित या बच्चे की मृत्यु एक अधूरी जीवन यात्रा है, जिसमें विशेष शांति की आवश्यकता होती है। भरणी पंचमी इन्हीं आत्माओं के लिए विशेष पवित्र तिथि है। निष्कर्षतः भरणी पंचमी पितृ पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष नाम है, जब अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों का श्राद्ध किया जाता है, और इसका विकल्प त्रयोदशी भी है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





