विस्तृत उत्तर
सुहागिन स्त्री का श्राद्ध = नवमी तिथि पर निर्धारित विशेष श्राद्ध।
### स्पष्ट उत्तर:
सुहागिन (अविधवा) स्त्री का श्राद्ध 'नवमी' को होता है।
### शास्त्रीय आधार:
जो स्त्री पति के जीवित रहते मृत्यु को प्राप्त हो, उसका श्राद्ध नवमी को होता है। इसे 'अविधवा नवमी' या 'मातृ नवमी' कहा जाता है।
### कौन है सुहागिन / अविधवा:
- ▸अविधवा = जो विधवा नहीं है।
- ▸अर्थात् जिसका पति जीवित रहते मृत्यु हुई हो।
- ▸सधवा अवस्था में मृत्यु = अविधवा।
### तिथि:
- ▸पितृ पक्ष की नवमी तिथि।
- ▸आश्विन कृष्ण नवमी।
### विशेष नाम:
1अविधवा नवमी
- ▸'अविधवा' = जो विधवा नहीं।
- ▸सधवा स्त्री की मृत्यु से जुड़ा नाम।
2मातृ नवमी
- ▸'मातृ' = माता।
- ▸माताओं के श्राद्ध से जुड़ा नाम।
### मुख्य विशेषताएँ:
3विशेष कोटि
- ▸सुहागिन स्त्री = एक विशेष कोटि की मृतक।
- ▸सामान्य पितरों से भिन्न।
4विशेष तिथि
- ▸केवल नवमी = इनके लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि।
5सम्मानजनक नाम
- ▸'अविधवा नवमी' और 'मातृ नवमी' = सम्मानजनक नाम।
- ▸सुहागिन स्त्री के प्रति विशेष सम्मान का प्रतीक।
### शास्त्रीय वर्गीकरण:
श्राद्ध कर्म में मृत्यु के प्रकार और अवस्था के आधार पर तिथियों का अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक विभाजन किया गया है।
मृत्यु के प्रकार और तिथियाँ
- ▸स्वाभाविक मृत्यु प्रतिपदा को → प्रतिपदा
- ▸अकाल मृत्यु → चतुर्दशी
- ▸सुहागिन स्त्री (अविधवा) → नवमी ← यहाँ
- ▸संन्यासी → द्वादशी
- ▸बच्चे → पंचमी / त्रयोदशी
- ▸अज्ञात तिथि → सर्वपितृ अमावस्या
### क्यों नवमी:
- ▸सुहागिन स्त्री = सौभाग्यवती, सधवा।
- ▸ऐसी स्त्री की मृत्यु को विशेष माना जाता है।
- ▸शास्त्रों ने इनके लिए नवमी को विशेष पवित्र तिथि निर्धारित किया।
### श्राद्धकर्ता का कर्तव्य:
एक विद्वान श्राद्धकर्ता के लिए इन भेदों को जानना अनिवार्य है, अन्यथा श्राद्ध का फल विपरीत हो सकता है।
### महत्व:
यह तिथि सिद्ध करती है कि सनातन धर्म में सुहागिन स्त्रियों का विशेष सम्मान है — उनके श्राद्ध के लिए अलग पवित्र तिथि निर्धारित है।
### निष्कर्ष:
सुहागिन (अविधवा) स्त्री का श्राद्ध पितृ पक्ष की 'नवमी' तिथि को होता है। इसे 'अविधवा नवमी' या 'मातृ नवमी' कहा जाता है। यह उन स्त्रियों के लिए है जो पति के जीवित रहते मृत्यु को प्राप्त हुई हों।
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