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नियम निषेध प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

नियम निषेध से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

क्या बेलपत्र कभी बासी होता है?

नहीं, शास्त्रों के अनुसार बेलपत्र 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता। इसे धोकर दोबारा शिव जी पर पूरी शुद्धता के साथ चढ़ाया जा सकता है।

बासी6 माहअद्वितीय विशेषता
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बेलपत्र चढ़ाते समय किन बातों की सावधानी (निषेध) रखनी चाहिए?

बेलपत्र कटा-फटा या उसमें कोई छेद नहीं होना चाहिए। चढ़ाते समय उसकी डंडी शिव जी की तरफ नहीं होनी चाहिए और चढ़ाए हुए पत्तों का अपमान नहीं करना चाहिए।

निषेधसावधानीखंडित पत्र
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क्या चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर दोबारा चढ़ा सकते हैं?

हाँ, स्कंदपुराण के अनुसार चढ़ाया हुआ बेलपत्र धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है। यह 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता।

पुनर्र्पणस्कंदपुराणशुद्धता
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किन तिथियों और दिनों में बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए?

बेलपत्र को रात में, सोमवार के दिन, दोपहर के बाद और विशेष तिथियों (जैसे चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, अमावस्या, पूर्णिमा और संक्रांति) पर तोड़ना मना है।

निषिद्ध कालतिथियाँसोमवार
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बेलपत्र तोड़ने का सही नियम और मंत्र क्या है?

बेलपत्र सूरज निकलने के बाद ही तोड़ना चाहिए और डाली नहीं तोड़नी चाहिए। तोड़ते समय मंत्र पढ़ना चाहिए: 'अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियः सदा...'।

पत्र तोड़नानियममंत्र
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प्रदोष व्रत का पारण कब करें?

प्रदोष व्रत उसी दिन रात में नहीं खोला जाता, बल्कि अगले दिन सुबह (चतुर्दशी तिथि को) सूरज निकलने के बाद व्रत खोला (पारण किया) जाता है।

व्रत पारणचतुर्दशीसूर्योदय
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प्रदोष व्रत के नियम?

इस व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिए। गुस्सा करना मना है, ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और सिर्फ अच्छे कामों (सात्त्विक) के लिए ही पूजा करनी चाहिए।

नियमब्रह्मचर्यसात्त्विक
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नियम निषेध — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नियम निषेध श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

नियम निषेध को गहराई से समझने का तरीका

नियम निषेध प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।