विस्तृत उत्तर
प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि) का पारण उसी दिन रात में नहीं किया जाता। शास्त्र-सम्मत विधान के अनुसार, प्रदोष व्रत का पारण (व्रत खोलना) अगले दिन चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय के पश्चात् (सुबह सूरज निकलने के बाद) किया जाना चाहिए।
प्रदोष व्रत उसी दिन रात में नहीं खोला जाता, बल्कि अगले दिन सुबह (चतुर्दशी तिथि को) सूरज निकलने के बाद व्रत खोला (पारण किया) जाता है।
प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि) का पारण उसी दिन रात में नहीं किया जाता। शास्त्र-सम्मत विधान के अनुसार, प्रदोष व्रत का पारण (व्रत खोलना) अगले दिन चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय के पश्चात् (सुबह सूरज निकलने के बाद) किया जाना चाहिए।
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