विस्तृत उत्तर
इस दिन व्रत करने वाले को अन्न का पूर्ण त्याग कर फलाहार लेना चाहिए। क्रोध नहीं करना चाहिए, पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और जितना संभव हो मौन रखना चाहिए। यह साधना केवल सात्त्विक (कल्याणकारी) उद्देश्यों के लिए है, किसी को हानि पहुँचाने या तामसिक कार्यों के लिए इसका प्रयोग सर्वथा वर्जित और आत्म-विनाशकारी है।





