विस्तृत उत्तर
वासवी शक्ति के एक बार उपयोग की सीमा का वर्णन महाभारत में स्पष्ट रूप से है।
मूल नियम — यह वासवी शक्ति इंद्र का अपना अस्त्र था जिसे उन्होंने कर्ण को दान में दिया था — परंतु एक शर्त के साथ। शर्त यह थी कि इसका उपयोग केवल एक बार किया जा सकता था। एक बार चलाने के बाद यह अस्त्र वापस इंद्र के पास लौट जाएगा।
कारण — यह अस्त्र स्वयं इंद्र का नित्य अस्त्र था — इसे स्थायी रूप से किसी को नहीं दिया जा सकता था। इंद्र ने इसे केवल एक बार उपयोग की सीमा के साथ उधार दिया था।
शक्ति का स्तर — वासवी शक्ति देवराज इंद्र के स्तर का दिव्यास्त्र था। इसे केवल एक बार उपयोग करने की सीमा ही इसे और दुर्लभ और मूल्यवान बनाती थी। कर्ण ने इसे पूरे महाभारत-युद्ध में संभालकर रखा — अर्जुन के लिए।





