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विस्तृत उत्तर
अकाल मृत्यु वाली आत्माएँ उग्र प्रेत योनि में मानी जाती हैं। उनके उग्र सूक्ष्म शरीर को शांत करने के लिए चतुर्दशी तिथि ही खगोलीय रूप से उपयुक्त बताई गई है। इसलिए अकाल मृत्यु में चतुर्थी श्राद्ध नहीं किया जाता।
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