का सरल उत्तर
प्रदोष व्रत उसी दिन रात में नहीं खोला जाता, बल्कि अगले दिन सुबह (चतुर्दशी तिथि को) सूरज निकलने के बाद व्रत खोला (पारण किया) जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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