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शिव वास गणना प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

शिव वास गणना से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

शिव वास शेषफल 7 हो तो क्या होता है?

शेषफल 7 या 0 = शिव श्मशान में। इस दिन सकाम रुद्राभिषेक = मृत्युतुल्य कष्ट और अकाल मृत्यु का भय। निष्काम भक्ति, श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि में यह नियम लागू नहीं।

शेषफल 7श्मशानअकाल मृत्यु
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रुद्राभिषेक के लिए सबसे शुभ तिथि कौन सी है?

सबसे शुभ: शेष 1 (कैलाश पर) और शेष 2 (गौरी के साथ)। कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (1), अष्टमी (8), अमावस्या (30) और शुक्ल पक्ष की द्वितीया (2), नवमी (9) — ये तिथियाँ सकाम रुद्राभिषेक के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

शुभ तिथि रुद्राभिषेककैलाश गौरीशेषफल 1 2
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किस दिन रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए?

शिव वास शेषफल 4, 5, 6, 7/0 होने पर सकाम रुद्राभिषेक न करें। शेष 7/0 = श्मशान में शिव = मृत्युतुल्य कष्ट। परंतु निष्काम भक्ति, श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि और ज्योतिर्लिंगों में शिव वास देखना आवश्यक नहीं।

रुद्राभिषेक कब नहींशिव वास अशुभश्मशान
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शिव वास की गणना कैसे करें?

शिव वास सूत्र: (तिथि × 2 + 5) ÷ 7 = शेषफल। शुक्ल पक्ष: 1-15 तिथि; कृष्ण पक्ष: 16-30। शेषफल 1 = कैलाश पर (शुभ); शेष 2 = गौरी सन्निधि (शुभ); शेष 7/0 = श्मशान (अशुभ)।

शिव वास गणनासूत्रतिथि गणित
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शिव वास क्या होता है?

शिव वास = किसी तिथि पर भगवान शिव की स्थिति (कैलाश पर, श्मशान में, भोजन में आदि)। सकाम रुद्राभिषेक के लिए शिव वास देखना अनिवार्य है। बिना शिव वास देखे किया गया सकाम अभिषेक विपरीत फल या मृत्युतुल्य कष्ट दे सकता है।

शिव वाससकाम रुद्राभिषेकमुहूर्त
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शिव वास गणना — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव वास गणना श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव वास गणना को गहराई से समझने का तरीका

शिव वास गणना प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।