विस्तृत उत्तर
शिव वास गणना के अनुसार शेषफल १ और २ सर्वाधिक शुभ हैं:
— शेषफल १ (कैलाश पर माता गौरी के साथ): सुख-समृद्धि, परिवार में आनंद की वृद्धि (अत्यंत शुभ)।
— शेषफल २ (माता पार्वती के सानिध्य में): सुख, संपत्ति, रोग-नाश, अभीष्ट सिद्धि (अत्यंत शुभ)।
— शेषफल ३ (वृषभारूढ़): सभी प्रकार की अभीष्ट सिद्धि, मनोकामना पूर्ण (शुभ)।
गणना के आधार पर किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (१), अष्टमी (८) और अमावस्या (३०) तथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया (२) व नवमी (९) के दिन भगवान शिव का वास माता गौरी के साथ होता है — ये तिथियाँ सकाम रुद्राभिषेक के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।




