विस्तृत उत्तर
वैदिक ज्योतिष और शैव आगमों के अनुसार, यदि अभिषेक किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति (सकाम कर्म) के लिए किया जा रहा है, तो 'शिव वास' (उस विशिष्ट तिथि पर भगवान शिव की स्थिति और स्थान) का विचार करना नितांत अनिवार्य है।
बिना शिव वास देखे किया गया सकाम अभिषेक विपरीत फल अथवा मृत्युतुल्य कष्ट दे सकता है।
सरल शब्दों में, शिव वास यह बताता है कि उस तिथि को भगवान शिव किस अवस्था में हैं — कैलाश पर माता गौरी के साथ हैं (अत्यंत शुभ), या श्मशान में (अत्यंत अशुभ)। इसी के आधार पर सकाम रुद्राभिषेक का मुहूर्त तय किया जाता है।





