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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध के लिए प्रातःकाल श्रेष्ठ नहीं माना गया। अष्टमी श्राद्ध कुतुप, रौहिण या अपराह्न काल में करना चाहिए।
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सुबह नहीं, कुतुप या अपराह्न में करें।
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