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दान एवं पुण्य प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

दान एवं पुण्य से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

कृष्णा गाय दान से वैतरणी पार होती है — इसका विस्तार क्या है?

गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय के अनुसार कृष्णा (काली) गाय का दान — जिसे 'वैतरणी गाय दान' कहते हैं — यमलोक-मार्ग पर वैतरणी नदी को पार कराता है। दान की गई गाय नदी के तट पर प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर पार होता है।

कृष्णा गायवैतरणी दानगोदान
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पशु-पक्षियों के लिए जलहीन स्थान पर जल देने का क्या फल मिलता है?

पशु-पक्षियों के लिए जलहीन स्थान पर जल देने से यममार्ग में जल मिलता है, वैतरणी सुगम होती है और स्वर्ग में सुख मिलता है। यह जल-दान सर्व-दानों में श्रेष्ठ माना गया है।

जल दानपशु पक्षीपुण्य
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मनुष्यों और पशुओं के लिए जलहीन स्थान में जल न देने का क्या पछतावा होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार जलहीन स्थान में जल न देने का पछतावा यममार्ग पर तब होता है जब पापी खुद प्यास से तड़पता है और यमदूत जल के बदले उबलता तेल पिलाते हैं। यह उसी कर्म का प्रतिफल है।

जल दानजलहीनपछतावा
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मृत्युकाल में गाय दान से क्या विशेष लाभ होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युकाल में किया गया गोदान वैतरणी नदी पार कराने वाला होता है — वह गाय यमलोक के मार्ग में प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर उस भयानक नदी से बिना कष्ट पार हो जाता है।

गोदानमृत्युकालवैतरणी
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दान एवं पुण्य — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दान एवं पुण्य श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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दान एवं पुण्य को गहराई से समझने का तरीका

दान एवं पुण्य प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।