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व्रत कथा प्रश्नोत्तर — 35 प्रश्न

व्रत कथा से जुड़े 35 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 35 प्रश्न

नेती धोपनी कौन थी और उसने बिहुला की मदद कैसे की?

नेती धोपनी स्वर्गलोक की धोबिन और माता मनसा की सहेली थी। बिहुला का सतीत्व देखकर उसी ने बिहुला को रास्ता दिखाया और उसे अपने साथ स्वर्गलोक (देवलोक) ले गई।

नेती धोपनीत्रिवेणी संगमस्वर्ग की धोबिन
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बिहुला ने देवलोक में भगवान शिव और देवताओं को कैसे प्रसन्न किया?

बिहुला ने देवलोक की सभा में अपने मरे हुए पति की अस्थियों (हड्डियों) को सामने रखकर इतना भावुक और करुण नृत्य किया कि भगवान शिव और सारे देवता रो पड़े और प्रसन्न हो गए।

बिहुला का नृत्यदेव सभाभगवान शिव
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चाँद सौदागर का अहंकार तोड़ने के लिए मनसा देवी ने क्या किया?

देवी मनसा ने उसका प्यारा 'गुआबाड़ी' बगीचा जला दिया, उसके 6 जवान बेटों को नागों से डसवा दिया, और 'कालीदह' समुद्र में उसकी 14 बड़ी नावें (व्यापार) डुबो कर उसे भिखारी बना दिया।

अहंकार विनाशगुआबाड़ी उद्यानकालीदह
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चाँद सौदागर ने मनसा देवी की पूजा उल्टे (बाएँ) हाथ से क्यों की थी?

क्योंकि उसने कसम खाई थी कि वह अपने सीधे (दाहिने) हाथ से सिर्फ भगवान शिव की पूजा करेगा। इसलिए अपना हठ रखने के लिए उसने पीठ फेरकर उल्टे (बाएँ) हाथ से फूल फेंका था।

बाएं हाथ से पूजाअहंकारशिव भक्त
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बिहुला ने अपने मृत पति (लक्ष्मिन्दर) को सर्प-दंश के बाद कैसे जीवित किया?

बिहुला अपने पति के शव की अस्थियां लेकर देवलोक पहुँची। वहाँ उसने भगवान शिव के सामने बहुत भावपूर्ण नृत्य किया, जिससे शिवजी प्रसन्न हुए और माता मनसा ने लक्ष्मिन्दर को अमृत छिड़ककर जीवित कर दिया।

लक्ष्मिन्दर का पुनर्जीवनदेवलोकनृत्य
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सती बिहुला कौन थी और वह मनसा देवी की कथा में क्यों प्रसिद्ध है?

बिहुला चाँद सौदागर की पुत्रवधू (लक्ष्मिन्दर की पत्नी) थी। वह इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि अपने पति की मौत के बाद वह केले की नाव पर उसके शव के साथ देवलोक गई और उसे वापस जीवित करवा लाई।

सती बिहुलालक्ष्मिन्दर की पत्नीसुहाग की रक्षा
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चाँद सौदागर कौन था और उसने मनसा देवी की पूजा करने से इंकार क्यों किया था?

चाँद सौदागर चंपक नगर का एक बहुत अमीर व्यापारी था। वह भगवान शिव का परम भक्त था और उसका घमंड था कि वह शिव के अलावा किसी अन्य देवी (खासकर मनसा देवी) की पूजा नहीं करेगा।

चाँद सौदागरचंपक नगरशिव भक्त
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पृथ्वी (मृत्युलोक) पर मनसा देवी की पूजा सबसे पहले किसने और कैसे शुरू की?

पृथ्वी पर मनसा देवी की पूजा सबसे पहले चंपक नगर के 'चाँद सौदागर' ने शुरू की थी। उसने देवी की ओर पीठ करके उल्टे (बाएँ) हाथ से उन पर फूल चढ़ाया था, जिसे माता ने स्वीकार कर लिया था।

प्रथम पूजामृत्युलोकचाँद सौदागर
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मनसा देवी की मुख्य व्रत कथा क्या है (चाँद सौदागर और बिहुला की कहानी)?

यह कथा शिव भक्त चाँद सौदागर के अहंकार, मनसा देवी द्वारा उसका सब कुछ नष्ट करने, और उसकी पुत्रवधू सती 'बिहुला' के महान त्याग की है, जिसने देवलोक जाकर अपने मृत पति को जीवित करवाया था।

चाँद सौदागरबिहुलामनसा मंगल
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ब्रह्महत्या जैसा घोर पाप किस व्रत से दूर होता है?

ऋषि के निर्देश पर क्षत्रिय ने कामिका एकादशी का व्रत कर रात भर जागरण किया था। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उसे ब्रह्महत्या जैसे घोर पाप से मुक्त कर दिया।

ब्रह्महत्याप्रायश्चितपाप मुक्ति
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कामिका एकादशी की व्रत कथा क्या है (क्षत्रिय और ब्राह्मण की कथा)?

एक क्रोधी क्षत्रिय से गलती से एक ब्राह्मण की हत्या हो गई थी। समाज से निकाले जाने के बाद, उसने एक ऋषि के कहने पर कामिका एकादशी का व्रत किया था।

व्रत कथाक्षत्रियब्राह्मण हत्या
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देवशयनी (पद्मा) एकादशी की व्रत कथा क्या है (राजा मान्धाता)?

राजा मान्धाता के राज्य में 3 साल तक भयंकर अकाल पड़ा था। महर्षि अंगिरा के कहने पर राजा और प्रजा ने पद्मा (देवशयनी) एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से भारी बारिश हुई और अकाल मिट गया।

राजा मान्धाताअकाल मुक्तिव्रत कथा
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मार्कण्डेय ऋषि ने हेममाली का उद्धार कैसे किया?

ऋषि मार्कण्डेय ने हेममाली का सच्चा पछतावा देखकर उसे आषाढ़ कृष्ण पक्ष की 'योगिनी एकादशी' का व्रत करने को कहा। इस व्रत के प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया और वह श्राप मुक्त हो गया।

मार्कण्डेय ऋषिउद्धारप्रायश्चित
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राजा कुबेर ने हेममाली को कुष्ठ रोग का श्राप क्यों दिया था?

काम-वासना के कारण शिव जी की पूजा में बाधा डालने पर क्रोधित राजा कुबेर ने हेममाली को स्वर्ग से निकालकर पृथ्वी पर 18 प्रकार के भयंकर कुष्ठ (कोढ़) रोग भुगतने का श्राप दे दिया था।

कुबेर का श्रापकुष्ठ रोगकर्तव्य लापरवाही
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योगिनी एकादशी की व्रत कथा (हेममाली यक्ष की कथा) क्या है?

अलकापुरी के राजा कुबेर का सेवक हेममाली रोज शिव पूजा के लिए मानसरोवर से फूल लाता था। एक दिन वह अपनी पत्नी के मोह में पड़कर फूल ले जाना भूल गया, जिससे राजा की पूजा रुक गई।

हेममाली कथाव्रत कथाअलकापुरी
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कौण्डिन्य ऋषि ने धृष्टबुद्धि का उद्धार कैसे किया?

गंगा स्नान करके लौट रहे कौण्डिन्य ऋषि के कपड़ों की पवित्र बूंदें धृष्टबुद्धि पर गिरीं, जिससे उसे अपने पापों का पछतावा हुआ। ऋषि के कहने पर उसने मोहिनी एकादशी का व्रत किया और विष्णुलोक प्राप्त किया।

कौण्डिन्य ऋषिप्रायश्चितधृष्टबुद्धि उद्धार
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मोहिनी एकादशी की व्रत कथा (धृष्टबुद्धि की कथा) क्या है?

भद्रावती नगरी के वैश्य धनपाल का बेटा 'धृष्टबुद्धि' अत्यंत दुष्ट और शराबी था। घर से निकाले जाने के बाद वह जंगल में जाकर चोरी और जानवरों की हत्या जैसे घोर पाप करने लगा था।

धृष्टबुद्धि कथाव्रत कथाधनपाल वैश्य
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सबसे पहले मोहिनी एकादशी का व्रत किसने किया था?

सबसे पहले त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने माता सीता के वियोग में अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था, जिससे उन्हें रावण पर विजय मिली थी।

प्रथम व्रतीभगवान राममहर्षि वशिष्ठ
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वरूथिनी एकादशी की व्रत कथा क्या है?

एक बार तपस्या करते समय राजा मान्धाता का पैर भालू ने चबा लिया था। भगवान विष्णु ने भालू को मारकर राजा को मथुरा जाकर 'वरूथिनी एकादशी' का व्रत करने को कहा। यह व्रत करने से राजा का पैर फिर से ठीक हो गया।

व्रत कथाराजा मान्धाताभालू का प्रसंग
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कामदा एकादशी की व्रत कथा क्या है (ललित गंधर्व और ललिता की कथा)?

ललित गंधर्व को राजा पुण्डरीक ने गलती करने पर 'राक्षस' बनने का शाप दे दिया था। उसकी पत्नी ललिता ने शृंगी ऋषि के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत किया, जिससे ललित वापस गंधर्व बन गया।

व्रत कथाललित और ललिताशृंगी ऋषि
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सत्यनारायण कथा में व्यापारी (वैश्य) को जेल क्यों हुई थी?

साधु वैश्य ने भगवान से मन्नत मांगी थी, लेकिन काम पूरा होने के बाद वह पूजा करना भूल गया (संकल्प तोड़ दिया)। इसी के दंडस्वरूप उसे राजा चंद्रकेतु ने चोरी के झूठे आरोप में जेल में डाल दिया था।

साधु वैश्यसंकल्प भंगझूठ का दंड
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सत्यनारायण व्रत की पहली कथा क्या है? (लकड़हारे और गरीब ब्राह्मण की कथा)

काशी के एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण और एक भील (लकड़हारे) ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया था, जिससे उनकी दरिद्रता दूर हुई। यह कथा बताती है कि भगवान के सामने कोई अमीर-गरीब या छोटी-बड़ी जात नहीं होती।

लकड़हारागरीब ब्राह्मणसामाजिक समावेशिता
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सत्यनारायण पूजा में प्रसाद न खाने से क्या होता है? (कलावती और राजा की कथा)

कथा के अनुसार, प्रसाद का अपमान करने या बिना प्रसाद खाए जाने से भयंकर नुकसान होता है। कलावती के प्रसाद न खाने पर उसके पति की नाव डूब गई थी और राजा तुंगध्वज का राज्य छिन गया था।

कलावतीराजा तुंगध्वजप्रसाद का महत्व
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शनिवार व्रत में राजा विक्रमादित्य और पिप्पलाद मुनि की कथा क्या है?

विक्रमादित्य को शनि का अपमान करने पर अपना राज्य और हाथ-पैर गंवाने पड़े थे। पिप्पलाद मुनि ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए शनि को तपोबल से दंडित किया था।

राजा विक्रमादित्यपिप्पलाद मुनिकथा
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शनिवार व्रत से जुड़ी राजा दशरथ की कथा क्या है?

राजा दशरथ ने अपनी प्रजा को अकाल से बचाने के लिए नक्षत्र मंडल में जाकर शनि देव को युद्ध की चुनौती दी थी। उनके साहस से प्रसन्न होकर शनि ने अकाल न लाने का वरदान दिया था।

राजा दशरथरोहिणी भेदनदशरथ शनि स्तोत्र
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शनिवार काली व्रत की कथा क्या है?

यह राजा विक्रमादित्य की कथा है, जिन्हें शनिदेव के प्रकोप से अपना राज्य और हाथ-पैर गंवाने पड़े थे। अंत में माता काली की पूजा से ही उन्हें शनि के प्रकोप से मुक्ति मिली थी।

राजा विक्रमादित्यकथाशनि प्रकोप
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संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा क्या है?

कथा के अनुसार एक गरीब स्त्री ने अनजाने में भूखे रहकर रात में संकष्टी का व्रत पूरा किया था। जब उसने अपने व्रत का पुण्य इंद्र को दिया, तो उनका रुका हुआ पुष्पक विमान फिर से उड़ने लगा।

राजा शूरसेनइंद्र का विमानव्रत कथा
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मासिक शिवरात्रि व्रत की कथा क्या है?

यह कथा एक शिकारी की है जिसने अनजाने में बेल के पेड़ पर बैठकर रात भर शिवलिंग पर पत्ते और जल गिराए थे, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे मोक्ष दिया।

शिकारी की कथालुब्धकशिव कृपा
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शनिवार व्रत की कथा क्या है?

कथा राजा विक्रमादित्य की है, जिन्होंने अहंकार में शनि देव का अपमान किया था जिससे उनका राज्य छिन गया। बाद में भूल मानकर व्रत करने से शनि देव ने उन्हें वापस सब कुछ लौटा दिया।

व्रत कथाराजा विक्रमादित्यशनि का प्रकोप
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वैभव लक्ष्मी व्रत की कथा क्या है?

कथा शीला नाम की महिला की है जिसके पति ने जुए और सट्टे में सब कुछ गँवाकर गहने तक गिरवी रख दिए थे। वैभव लक्ष्मी व्रत करने से उसका पति सुधर गया और सारा खोया हुआ धन वापस मिल गया।

शीला की कथागिरवी रखे गहनेधन की वापसी
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संतोषी माता व्रत की कथा क्या है?

कथा एक गरीब बहू की है जिसे ससुराल वाले बहुत सताते थे। संतोषी माता का व्रत करने से उसका पति परदेस से धनवान होकर लौटा और माता ने जेठानियों के षड्यंत्र को विफल कर बहू को सम्मान दिलाया।

व्रत कथाबुढ़िया के सात बेटेबहू का संघर्ष
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गुरुवार व्रत की कथा क्या है?

इसकी कथा एक कंजूस रानी की है जिसने गुरुवार को बाल और कपड़े धोकर अपना सारा धन नष्ट कर दिया था। बाद में उसने 16 गुरुवार व्रत रखकर और चने की दाल-गुड़ का भोग लगाकर अपना खोया धन वापस पाया।

व्रत कथाइंद्र और बृहस्पतिराजा रानी की कथा
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बुधवार व्रत की कथा क्या है?

कथा के अनुसार मधुसूदन वैश्य ने शुभ न होने पर भी बुधवार को अपनी पत्नी को ससुराल से विदा कराया। रास्ते में बुध देव ने उसका रूप धर लिया। क्षमा मांगने पर बुध देव ने उसे माफ किया।

मधुसूदन कथादिशाशूलबुध देव की लीला
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सोलह सोमवार व्रत की कथा (कहानी) क्या है?

यह कथा एक पुजारी की है जिसे पार्वती जी ने कोढ़ी होने का श्राप दिया था। 16 सोमवार व्रत करने से वह ठीक हो गया। इसी व्रत से पार्वती जी ने कार्तिकेय को और एक ब्राह्मण ने राजकुमारी को पाया।

व्रत कथाशिव पार्वतीसोलह सोमवार कथा
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मंगलवार व्रत की कहानी (कथा) क्या है?

पहली कथा में हनुमान जी ने निस्संतान ब्राह्मणी को पुत्र देकर उसके सत्य की रक्षा की। दूसरी कथा में एक बुढ़िया माई को उसकी बहू ने सताया, तो स्वयं हनुमान जी ने बालक बनकर उसे खाना दिया।

व्रत कथाब्राह्मण दंपत्तिबुढ़िया माई
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व्रत कथा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर व्रत कथा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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व्रत कथा को गहराई से समझने का तरीका

व्रत कथा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

35 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।