विस्तृत उत्तर
मंगलवार व्रत की दो प्रमुख कथाएँ हैं। पहली कथा एक निस्संतान ब्राह्मण दंपत्ति की है। पत्नी के व्रत रखने पर हनुमान जी ने प्रसन्न होकर उसे 'मंगल' नाम का पुत्र दिया। बाद में संदेह के कारण जब ब्राह्मण ने बालक को कुएं में धक्का दिया, तो हनुमान जी ने उसे जीवित बचा लिया, जिससे सत्य की जीत हुई। दूसरी कथा एक बुढ़िया माई की है जो नियमित व्रत करती थी। उसकी बहू ने तंग आकर उसे खाना देना बंद कर दिया। तब हनुमान जी ने स्वयं बालक रूप में आकर बुढ़िया के लिए भोजन (दूध और चूरमा) और आश्रय की व्यवस्था की, जिसे देखकर बहू-बेटे को अपनी भूल का अहसास हुआ और पूरा परिवार भक्त बन गया।