विस्तृत उत्तर
कथा के अनुसार एक बुढ़िया अपने सातवें बेरोजगार बेटे को जूठन खिलाती थी। यह जानकर बेटा धन कमाने परदेस चला जाता है। पति के जाने के बाद सास-जेठानियां बहू पर घोर अत्याचार करती हैं और उसे भूसी की रोटी खाने को देती हैं। जंगल में लकड़ियां चुनते हुए बहू को संतोषी माता के व्रत का पता चलता है। वह श्रद्धा से गुड़-चने का व्रत करती है। माता की कृपा से उसका पति अमीर बनकर लौटता है। जब बहू उद्यापन करती है, तो ईर्ष्यालु जेठानियां साजिश कर बच्चों को खटाई खिला देती हैं जिससे उन पर विपत्ति आ जाती है। अंत में क्षमा मांगने पर माता सबको माफ कर घर में खुशियां लौटा देती हैं।