विस्तृत उत्तर
पौराणिक आख्यानों के अनुसार, त्रेतायुग में मोहिनी एकादशी का व्रत सबसे पहले स्वयं भगवान श्रीराम ने किया था। जब माता सीता के वियोग में भगवान राम अत्यंत व्याकुल होकर विलाप कर रहे थे, तब उन्होंने महर्षि वशिष्ठ से अपने मानसिक कष्ट को दूर करने का उपाय पूछा था। महर्षि वशिष्ठ के निर्देश पर भगवान राम ने यह व्रत किया, जिससे उन्हें सीता जी की खोज में सफलता मिली। इसके बाद कौण्डिन्य ऋषि के उपदेश से धृष्टबुद्धि ने और श्रीकृष्ण के निर्देश पर युधिष्ठिर ने भी यह व्रत किया था।





