विस्तृत उत्तर
भविष्य और पद्म पुराण के अनुसार, नर्मदा नदी के तट पर राजा मान्धाता नाम के एक तपस्वी राजा का राज था। एक बार जब वे जंगल में ध्यान कर रहे थे, तो एक जंगली भालू ने उनका पैर चबाना शुरू कर दिया और उन्हें जंगल के अंदर घसीट ले गया। राजा ने क्रोध नहीं किया, बल्कि भगवान विष्णु को पुकारा। विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से भालू को मार दिया। जब राजा अपने खाए हुए पैर को देखकर दुखी हुए, तो भगवान ने बताया कि यह उनके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है। भगवान ने उन्हें मथुरा जाकर 'वरूथिनी एकादशी' का व्रत करने और 'वराह अवतार' की पूजा करने को कहा। राजा ने ऐसा ही किया और उनका पैर फिर से स्वस्थ हो गया। यह कथा बताती है कि भक्ति से पिछले जन्म के बुरे कर्म भी कट जाते हैं।