विस्तृत उत्तर
अध्याय 3 'संकल्प-भंग' (Breaking a Vow) के परिणामों पर केंद्रित है। साधु नामक वैश्य ने संतान प्राप्ति के लिए सत्यनारायण पूजा की मन्नत मांगी, परंतु बेटी (कलावती) होने पर व्रत विवाह तक टाल दिया। विवाह पर भी वह व्रत भूल गया। भगवान को सुख में भूल जाने के दंडस्वरूप, उसे राजा चंद्रकेतु द्वारा चोरी के झूठे आरोप में जेल में डाल दिया गया। बाद में जब उसने नाव में धन होने पर झूठ बोला कि उसमें 'लता-पत्र' हैं, तो भगवान ने उसे सच कर दिया। घर पर पत्नी लीलावती की पूजा के बाद ही उसे जेल से मुक्ति और धन वापस मिला।





