विस्तृत उत्तर
यह कथा अंग देश के चंपक नगर के शिव-भक्त और धनवान महाजन 'चाँद सौदागर' की है। उसने अहंकारवश मनसा देवी की पूजा करने से मना कर दिया। क्रोधित देवी ने उसके उद्यान जला दिए, 6 पुत्रों को मार डाला और 14 नावें डुबो दीं। फिर भी वह नहीं झुका। अंततः देवी ने उसके सातवें पुत्र लक्ष्मिन्दर को विवाह की रात सर्प-दंश करवाया। तब लक्ष्मिन्दर की सती पत्नी 'बिहुला' केले की नाव पर अपने मृत पति का शव लेकर देवलोक गई। अपने सतीत्व और नृत्य से शिव और देवताओं को प्रसन्न कर उसने देवी मनसा से अपने पति के प्राण और श्वसुर का सारा वैभव वापस पा लिया।





