विस्तृत उत्तर
शनिवार व्रत में मुख्य रूप से राजा विक्रमादित्य की कथा सुनी जाती है। कथा के अनुसार राजा विक्रमादित्य ने नवग्रहों की सभा में शनि देव को क्रूर बताकर उनका अपमान कर दिया था। इसके प्रकोप से राजा का राज्य छिन गया, उन्हें चोरी के झूठे आरोप में हाथ-पैर कटवाने पड़े और एक तेली के यहाँ कोल्हू चलाना पड़ा। जब राजा ने अपनी भूल मानी और शनिवार का व्रत किया, तो शनि देव ने प्रसन्न होकर उन्हें उनके अंग और राज्य वापस लौटा दिए।