विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के 4थे और 5वें अध्याय के अनुसार सत्यनारायण व्रत में पूजा स्थल से बिना प्रसाद खाए जाना 'अक्षम्य अपराध' है।
अध्याय 4 में कलावती पूजा छोड़कर अपने पति से मिलने दौड़ पड़ती है (प्रसाद नहीं खाती), जिससे ईश्वरीय कृपा का अपमान होता है और उसके पति सहित नाव डूब जाती है।
अध्याय 5 में राजा तुंगध्वज अहंकार के कारण गोप-ग्वालों का दिया प्रसाद ग्रहण नहीं करता। 'सत्य' के इस तिरस्कार के कारण उसका राज्य और पुत्र नष्ट हो जाते हैं। जब वह लौटकर ग्वालों के साथ प्रसाद खाता है, तभी उसे सब वापस मिलता है।





