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विस्तृत उत्तर
नेती धोपनी के साथ देवलोक पहुँचने पर, बिहुला ने देव-सभा में अपने मृत पति की अस्थियों को सामने रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की स्तुति में अत्यंत करुण, मार्मिक और भावपूर्ण नृत्य किया। उसके नृत्य में उसकी 6 महीने की घोर पीड़ा, उसका अखंड सतीत्व और माता के प्रति पूर्ण समर्पण स्पष्ट झलक रहा था। यह देखकर शिव जी द्रवित हो उठे और उन्होंने माता मनसा को लक्ष्मिन्दर को जीवित करने का आदेश दिया।
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