विस्तृत उत्तर
पौराणिक कथा के अनुसार, एक शिकारी (लुब्धक) अनजाने में शिवरात्रि के दिन भूखा-प्यासा बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उसके हिलने-डुलने से बेल के पत्ते और पानी की बूंदें पेड़ के नीचे छिपे शिवलिंग पर गिरती रहीं। इस प्रकार उसने अनजाने में चारों प्रहर की पूजा और उपवास कर लिया। इस साधारण सी क्रिया से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष प्रदान किया।





