विस्तृत उत्तर
भविष्य पुराण के अनुसार, सतयुग में राजा मान्धाता के राज्य में 3 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई और भीषण अकाल पड़ गया। राजा समाधान के लिए महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुँचे। महर्षि ने बताया कि राज्य में एक शूद्र द्वारा अनाधिकृत तपस्या करने से यह प्राकृतिक असंतुलन हुआ है। राजा ने निरपराध को मारने से मना कर दिया। तब महर्षि ने राजा और प्रजा को 'आषाढ़ शुक्ल एकादशी' (पद्मा एकादशी) का व्रत करने को कहा। इसके प्रभाव से मूसलाधार बारिश हुई और राज्य का अकाल खत्म हो गया।