विस्तृत उत्तर
व्रत की दो प्रमुख कथाएँ हैं। पहली कथा में देवराज इंद्र ने अहंकारवश गुरु बृहस्पति का अपमान किया, जिससे उनका राजपाट छिन गया। ब्रह्मा जी के कहने पर उन्होंने गुरुवार व्रत कर गुरु को प्रसन्न किया और स्वर्ग वापस पाया। दूसरी लोक कथा एक दानी राजा और उसकी कंजूस रानी की है। रानी ने साधु (बृहस्पति) से धन नाश का उपाय पूछा और गुरुवार को बाल धोकर, कपड़े धोकर सब खजाना खाली कर दिया। बाद में भूल का अहसास होने पर रानी ने विधि-विधान से 16 गुरुवार व्रत किया, चने की दाल-गुड़ का भोग लगाया और खोया ऐश्वर्य वापस पाया।