विस्तृत उत्तर
शिव पुराण की कथा के अनुसार, अमरावती नगर के एक शिवालय में शिव-पार्वती ने चौसर खेली। वहां के पुजारी ने आवेश में कहा कि शिव जीतेंगे, पर पार्वती जीतीं। क्रोधित होकर पार्वती जी ने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दिया। बाद में अप्सराओं के सुझाव पर पुजारी ने 16 सोमवार का व्रत किया और वह स्वस्थ हो गया। यह रहस्य जानकर माता पार्वती ने रूठे कार्तिकेय को पाने के लिए, कार्तिकेय के मित्र ब्राह्मण ने राजकुमारी से विवाह के लिए, राजकुमारी ने पुत्र प्राप्ति के लिए और उस पुत्र ने राज्य प्राप्ति के लिए यह व्रत किया। यह कथा दर्शाती है कि व्रत स्वास्थ्य, विवाह, संतान और ऐश्वर्य देता है।

