विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में एक क्रोधी क्षत्रिय का एक ब्राह्मण से विवाद हो गया। क्रोध में आकर क्षत्रिय ने ब्राह्मण पर प्रहार किया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इस 'ब्रह्महत्या' के पाप के कारण गाँव के पंडितों ने उसे पापी घोषित कर समाज से बहिष्कृत कर दिया। पश्चाताप की आग में जलते हुए वह एक ऋषि की शरण में गया, जिन्होंने उसे श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की 'कामिका एकादशी' का व्रत करने का निर्देश दिया।