विस्तृत उत्तर
जब सती बिहुला ने सब कुछ वापस ला दिया, तो चाँद सौदागर को मनसा देवी की पूजा करनी पड़ी। परंतु वह जीवन भर सिर्फ शिव की पूजा करता आया था और उसका हठ पूरी तरह नहीं गया था। उसने कसम खाई थी कि जिस दाहिने हाथ से वह शिव पर बिल्वपत्र चढ़ाता है, उससे किसी और को नहीं पूजेगा। इसलिए उसने एक मध्य मार्ग निकाला— उसने देवी की मूर्ति की तरफ पीठ कर ली और बाएँ (उल्टे) हाथ से फूल पीछे की तरफ फेंककर पूजा की, जिसे माता ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।





