विस्तृत उत्तर
भद्रावती नगरी में 'धनपाल' नाम का एक परोपकारी वैश्य रहता था। उसके पाँच पुत्र थे, जिनमें से पाँचवाँ पुत्र 'धृष्टबुद्धि' अत्यंत दुष्ट और पापाचारी था। वह जुआ, मदिरा और वेश्यागमन में पिता का धन लुटाता था। एक दिन तंग आकर धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया। दरिद्र होने पर धृष्टबुद्धि जंगल में जाकर चोरी करने और निर्दोष पशु-पक्षियों की हत्या करने लगा। वह पाप की कीचड़ में धंसकर अत्यंत व्याकुल और दुखी रहने लगा।