का सरल उत्तर
सबसे पहले त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने माता सीता के वियोग में अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था, जिससे उन्हें रावण पर विजय मिली थी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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