विस्तृत उत्तर
प्राचीन काल में समतापुर का मधुसूदन वैश्य अपनी पत्नी संगीता को विदा कराने ससुराल गया। उसने बुधवार के दिन ही विदाई का हठ किया, जबकि ज्योतिष में बुधवार को विदाई (दिशाशूल) अशुभ मानी जाती है। रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूटा और पत्नी के पास मधुसूदन की ही शक्ल का एक और पुरुष (स्वयं बुध देव) आ गया। असली-नकली को लेकर झगड़ा हुआ और राजा भी न्याय न कर सका। तब आकाशवाणी हुई कि यह बुधवार को यात्रा करने का फल है। मधुसूदन के क्षमा मांगने पर बुध देव अंतर्ध्यान हो गए और वे पति-पत्नी नियमित व्रत करने लगे।





