ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

मंत्र और ध्यान प्रश्नोत्तर — 25 प्रश्न

मंत्र और ध्यान से जुड़े 25 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 25 प्रश्न

माँ काली का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'शवारूढां महाभीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीम्...' अर्थ: शव पर आरूढ़, घोर दाँत, हँसता मुख, खड्ग-मुण्ड-वर-अभय मुद्रा। मुण्डमाला, लपलपाती जिह्वा, दिगम्बरा, श्मशान में निवास करने वाली काली।

काली ध्यान श्लोकशवारूढ़ांचतुर्भुजां
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ काली के मूल मंत्र कौन से हैं?

काली मूल मंत्र: (1) 'ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके... स्वाहा:' (2) 'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिण कालिके... स्वाहा।' (3) 'ॐ श्री महा कालिकायै नमः'

काली मूल मंत्रदक्षिण कालिकाॐ क्रीं ह्रीं हूं
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ काली का बीज मंत्र क्या है और 'क्रीं' का क्या अर्थ है?

माँ काली का बीज मंत्र: क्रीं। अर्थ: 'क' = पूर्ण ज्ञान; 'र' = शुभ; बिंदु = स्वतंत्रता/मुक्ति देने वाली शक्ति।

काली बीज मंत्रक्रींपूर्ण ज्ञान
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ तारा का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'अटटाटटहास्निर्तामतिघोररूपाम्...' अर्थ: अट्टहास करती, घोर रूप, बाघ की खाल, मस्तक पर चंद्रमा, घना नीला वर्ण। हाथों में कर्त्री-कपाल-कमल-तलवार, तीन नेत्र, शव पर आरूढ़ — उन तारा देवी को प्रणाम।

तारा ध्यान श्लोकअट्टहासव्याघ्राम्बर
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ भुवनेश्वरी का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'ॐ बालरविद्युतिमिन्दुकरीटां तुङ्गकुचां नयनत्रययुक्ताम्...' अर्थ: उदयकालीन सूर्य-कांति, चंद्रकला किरीट, उन्नत पयोधर, तीन नेत्र, मंद मुस्कान, वरद-अंकुश-पाश-अभय मुद्रा वाली भुवनेश्वरी की वंदना।

भुवनेश्वरी ध्यान श्लोकबालरविद्युतिइंदुकरीटां
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ भुवनेश्वरी के मूल मंत्र कौन से हैं?

भुवनेश्वरी मूल मंत्र: (1) 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौः भुवनेश्वर्ये नमः', (2) केवल 'ह्रीं', (3) 'ह्नीं भुवनेश्वरीयै ह्नीं नमः'

भुवनेश्वरी मूल मंत्रॐ ह्रीं श्रीं क्लींभुवनेश्वर्ये नमः
पूरा उत्तर पढ़ें →

'ह्रीं' बीज मंत्र का क्या अर्थ है?

'ह्रीं' = माया बीज या शक्ति बीज। सृष्टि (रचना) + स्थिति (पालन) + लय (विनाश) — तीनों शक्तियों का द्योतक। माँ भुवनेश्वरी की उस शक्ति का प्रतीक जो ब्रह्मांड को धारण-पोषण-संचालित करती है।

ह्रीं अर्थमाया बीजसृष्टि स्थिति लय
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ भुवनेश्वरी का बीज मंत्र क्या है?

माँ भुवनेश्वरी का बीज मंत्र: ह्रीं। इसे 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' भी कहते हैं। यह सृष्टि, स्थिति और लय — तीनों शक्तियों का द्योतक है।

भुवनेश्वरी बीज मंत्रह्रींमाया बीज
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ छिन्नमस्ता का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'प्रचण्डचण्डिकां वक्ष्ये सर्वकामफलप्रदाम्। यस्याः स्मरणमात्रेण सदाशिवो भवेन्नरः॥' अर्थ: सर्वकामना सिद्धि देने वाली प्रचंड चंडिका का वर्णन — जिनके स्मरण मात्र से मनुष्य सदाशिव स्वरूप हो जाता है।

छिन्नमस्ता ध्यान श्लोकप्रचंड चंडिकासर्वकाम सिद्धि
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ छिन्नमस्ता का मूल मंत्र क्या है?

माँ छिन्नमस्ता का मूल मंत्र: 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:'

छिन्नमस्ता मूल मंत्रवज्रवैरोचनीयैहूं हूं फट् स्वाहा
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ त्रिपुर भैरवी का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'उद्यद्भानुसहस्रकान्तिमरुणाक्षौमां शिरोमालिकां...' अर्थ: सहस्र सूर्य-कांति, रक्तवर्ण वस्त्र, मुण्डमाला, जपमाला-विद्या-अभय-वर हाथों में, तीन नेत्र, कमलमुख, चंद्रकला+रत्न मुकुट, मंद मुस्कान वाली भैरवी की वंदना।

त्रिपुर भैरवी ध्यान श्लोकउद्यद्भानुजपवटी विद्या
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ त्रिपुर भैरवी के मूल मंत्र कौन से हैं?

त्रिपुर भैरवी मूल मंत्र: (1) 'ह स: हसकरी हसे।' (2) 'ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा।' (3) 'ओम रीम भैरवी क्लोम रीम स्वाहा।' (4) 'ॐ त्रिपुरायै विद्महे महाभैरव्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।'

त्रिपुर भैरवी मूल मंत्रह सः हसकरीॐ ह्रीं भैरवी
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ धूमावती का ध्यान किस स्वरूप पर किया जाता है?

धूमावती ध्यान स्वरूप: उग्र, वृद्धा, विधवा, विवर्णा, कृशकाय, बिखरे केश, हाथ में सूप, कौवे के ध्वज वाले रथ पर, क्षुधातुर, कठोर नेत्र, कलहप्रिया, भयोत्पादक। कवच: पिप्पलाद ऋषि, निवृत छंद, धूमावती देवता।

धूमावती ध्यानउग्र वृद्धासूप कौवा ध्वज
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ धूमावती का तांत्रिक मंत्र क्या है?

माँ धूमावती का तांत्रिक मंत्र: 'धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे। सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:॥'

धूमावती तांत्रिक मंत्रधूम्रा मतिवसौभाग्यदात्री
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ धूमावती के मूल मंत्र कौन से हैं?

माँ धूमावती के मूल मंत्र: (1) 'धूं धूं धूमावती ठः ठः', (2) 'ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:', (3) 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्'

धूमावती मूल मंत्रधूं धूं धूमावतीठः ठः
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ बगलामुखी का ध्यान श्लोक क्या है?

ध्यान श्लोक: 'मध्ये सुधाब्धिमणिमण्डपरत्नवेद्यां सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णाम्...' अर्थ: अमृत सागर के मध्य मणिमंडप में, पीत वर्णा, पीले वस्त्र-आभूषण-माला से विभूषित, हाथ में मुद्गर और शत्रु जिह्वा धारण करने वाली देवी का स्मरण।

बगलामुखी ध्यान श्लोकसुधाब्धिमणिमंडप
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ बगलामुखी के मूल मंत्र का क्या अर्थ है?

मूल मंत्र का अर्थ: हे बगलामुखी! सभी दुष्टों की — वाणी, मुख और गति को स्थिर करो; जीभ को कील दो; बुद्धि का नाश करो।

बगलामुखी मंत्र अर्थवाचं स्तम्भयबुद्धिं विनाशय
पूरा उत्तर पढ़ें →

माँ बगलामुखी का मूल मंत्र क्या है?

बगलामुखी मूल मंत्र: 'ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा:' अन्य मंत्र: 'ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हन'

बगलामुखी मूल मंत्रस्तम्भय जिह्वांसर्वदुष्टानां
पूरा उत्तर पढ़ें →

मंत्र और ध्यान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर मंत्र और ध्यान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

मंत्र और ध्यान को गहराई से समझने का तरीका

मंत्र और ध्यान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

25 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।