विस्तृत उत्तर
माँ तारा (नील सरस्वती तारा) का ध्यान श्लोक:
अटटाटटहास्निर्तामतिघोररूपाम्। व्याघ्राम्बराम शशिधरां घननीलवर्नाम॥ कर्त्रीकपालकमलासिकराम त्रिनेत्रां। मालीढपादशवगां प्रणमामि ताराम्॥
अर्थ: जो अट्टहास करती हैं, अत्यंत घोर रूप वाली हैं, बाघ की खाल पहनती हैं, मस्तक पर चंद्रमा धारण करती हैं, घने नीले वर्ण की हैं, जिनके हाथों में कर्त्री (काटने का हथियार), कपाल, कमल और तलवार है, जो तीन नेत्रों वाली हैं, और जो शव पर आरूढ़ (आलीढ मुद्रा में) हैं, उन तारा देवी को मैं प्रणाम करता हूँ।
एक अन्य ध्यान में उन्हें हरे रंग का, कमल पर आसीन और एक हाथ से सुरक्षा मुद्रा प्रदर्शित करते हुए वर्णित किया गया है।
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