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विस्तृत उत्तर
शिखण्डभृत्, जटामाली और अट्टहास महेश्वर के योगाचार्यावतारों की सूची में आए नाम हैं। इनके पहले गुहावासी और इनके बाद दारुक तथा लांगली का उल्लेख आता है। पाठ में इन तीनों की अलग घटनाएँ नहीं दी गईं, पर वे अट्ठाईस योगाचार्य अवतारों के क्रम में स्पष्ट रूप से शामिल हैं। इसलिए उनका अर्थ यहाँ योगाचार्यावतार-नाम के रूप में ही लेना चाहिए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 40, श्लोक 30-34
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