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विस्तृत उत्तर
योगेश्वरों के चार-चार शिष्य काम, क्रोध आदि विकारों से रहित बताए गए हैं। पाठ में कहा गया है कि सभी युगावर्तों में महेश्वर के योगाचार्यावतार हुए और प्रत्येक द्वापर में व्यास भी हुए। उन योगेश्वरों में सभी के चार-चार शिष्य थे। इन शिष्यों का विशेष गुण यह बताया गया है कि वे काम-क्रोधादि विकारों से रहित थे।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 40, श्लोक 35-36
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