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विस्तृत उत्तर
श्वेतवाराह कल्प वर्तमान कल्प के रूप में बताया गया है। सूतजी कहते हैं कि वर्तमान कल्प को श्वेतवाराह कल्प जानना चाहिए। इसी कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वन्तर में महेश्वर के योगावतारों, शिष्यों और प्रशिष्यों का वर्णन किया जाता है। पाठ में श्वेतवाराह कल्प की अलग उत्पत्ति-कथा यहाँ नहीं दी गई, केवल वर्तमान कल्प के रूप में उसकी पहचान दी गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 39, श्लोक 29
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