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विस्तृत उत्तर
कपिल, आसुरि, मुनि पंचशिख और महायोगी वाल्कल योगाचार्यों के शिष्यों की सूची में आते हैं। पाठ में इन्हें श्वेत, सनक, सनन्द, सनातन आदि अनेक शिष्यों की उसी परम्परा में रखा गया है। इस समूह के शिष्यों को धर्मात्मा, महान् ओजस्वी, विमल आत्मा, सिद्ध और ब्रह्मनिष्ठ कहा गया है। इसलिए ये योगाचार्य-शिष्य परम्परा के महात्मा शिष्य हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 40, श्लोक 37-52
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