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वैदिक स्वरूप प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

वैदिक स्वरूप से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

'तद्विष्णोः परमं पदं' मंत्र का क्या अर्थ है?

ऋग्वेद (1.22.20): 'तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः।' अर्थ: ज्ञानी और योगारूढ़ पुरुष विष्णु के उस परम पद (वैकुंठ) का निर्बाध दर्शन करते हैं — जैसे आकाश में सूर्य रूपी नेत्र। यह मंत्र विष्णु को मोक्ष का अंतिम लक्ष्य सिद्ध करता है।

तद्विष्णोः परमं पदंमोक्ष लक्ष्यऋग्वेद
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'त्रीणि पदा विचक्रमे' मंत्र का क्या अर्थ है?

ऋग्वेद (1.22.18): 'त्रीणि पदा विचक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः। अतो धर्माणि धारयन्॥' अर्थ: सृष्टि के रक्षक (गोपाः) भगवान विष्णु तीन कदमों से सम्पूर्ण जगत को नाप लेते हैं और वे ही समस्त धर्मों को धारण करते हैं।

त्रीणि पदा विचक्रमेऋग्वेद मंत्रधर्म धारण
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ऋग्वेद में विष्णु को 'त्रिविक्रम' क्यों कहते हैं?

त्रिविक्रम = तीन पगों से ब्रह्मांड नापने वाले। तीन पद = आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी में सर्वव्यापी प्रभाव। सूर्य की तीन अवस्थाएं (उदय, मध्य, अस्त) भी। आध्यात्मिक अर्थ: जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति पार कर 'तुरीय' (परम चेतना) में प्रवेश।

त्रिविक्रमतीन पगऋग्वेद
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वैदिक स्वरूप — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर वैदिक स्वरूप श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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वैदिक स्वरूप को गहराई से समझने का तरीका

वैदिक स्वरूप प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।